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Thursday, 27 May 2010

हवस के बादल

तू हवस के बादलों से घिरी है , इश्क़ वालों की नदी सूखी पडी है।
गोया रावण राम से डरता है लेकिन ,आज लक्ष्मण के हवाले झोपडी है।
शहर को अपने अमीरों की दुआ है , गाडियों मे लोन की तख्ती लगी है।
बच्चे पागल कह के मेरा पीछा करते,ये फ़कीरी मुझको तुमसे ही मिली है।
मैं सिकन्दर का पुराना साथी हूं पर, आज पोरष के लिये दीवानगी है।
मेरे दिल का ताला लगता भी नहीं , तेरी आंखें साजिशों से भरी है।
दिल का परवाना शहादत दे चुका है , शमा जाने क्यूं अकेले जल रही है ।
चांद पानी मांगने मजबूर है फ़िर , चांदनी की अब्र से जब दोस्ती है ।
शहर मे तेरे अदावत की सडक है ,गांव मे मेरे मुहब्बत की गली है ।
प्रस्तुतकर्ता ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι पर ५:३२ AM