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Thursday, 20 May 2010

मां

रात के साये से जब भी डरता हूं मै ,अपनी मां को याद बेहद करता हूं मैं।
जल्द ही लोरी सुनाने वो आ जाती ,सुन के लोरी फ़िर चैन से सोता हूं मैं।
सदियों से ऐसी रिवायत चल रही है,तौरे-माज़ी हूं कभी ना बदला हूं मैं।
ज़िन्दगी भर उनको क्यूं मैंने दिया दुख, अपने इस अहसास से अब लड्ता हूं मैं।
मेरे कारण रोज़ मरती है वो जग में , उनके कारण जहां मे आया हूं मैं।
बा-अदब इक शांत दिल वाली नदी वो ,दंभ से अपने,उफ़नता दरिया हूं मैं।
पर मेरी बीबी मुझे ये कहती दानी , ऐसे बूढे बोझ को क्यूं ढोता हूं मैं।
Posted by ѕнαιя ∂я. ѕαηנαу ∂αηι at 2:44 AM 0 comments
Labels: बीबी
Tuesday, May 18, 2010